नवग्रह मंत्र (शान्ति श्लोक और बीज मंत्र)
नवग्रह मंत्र
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ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥
सूर्य — ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥
चन्द्रमा — ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः॥
मंगल — ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥
बुध — ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः॥
गुरु (बृहस्पति) — ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः॥
शुक्र — ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥
शनि — ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥
राहु — ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥
केतु — ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः॥
अर्थ
ब्रह्मा, विष्णु, शिव और सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु — सभी ग्रह हमारे लिए शान्ति देने वाले हों। नीचे हर ग्रह का बीज मंत्र दिया गया है।
जाप विधि
रोज़ सुबह एक बार शान्ति श्लोक; जिस ग्रह की शान्ति करनी हो उसका बीज मंत्र उसके दिन (जैसे शनि — शनिवार) 108 बार। पूरा अनुष्ठान (जैसे शनि के 23,000 जाप) पंडित जी के मार्गदर्शन में करें।
स्रोत / अधिकार: वैदिक / पारम्परिक (सार्वजनिक) — पारम्परिक नवग्रह स्तोत्र (पौराणिक श्लोक) और बीज मंत्र
