Sharad Navratri शारदीय नवरात्रि
Aaj Navratri ka Din 9 — Maa Mahagauri
माँ दुर्गा के नौ रूपों की नौ दिन आराधना — घटस्थापना से महानवमी तक, फिर विजयादशमी।
Celebrate every sacred day with its Katha, Puja Vidhi, Aarti, Mantra and divine meaning.
Aaj Navratri ka Din 9 — Maa Mahagauri
माँ दुर्गा के नौ रूपों की नौ दिन आराधना — घटस्थापना से महानवमी तक, फिर विजयादशमी।
नवरात्रि की महाअष्टमी — माँ महागौरी की पूजा, सन्धि पूजा और कन्या पूजन।
श्री राम की रावण पर और माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय — असत्य पर सत्य की जीत।
Monday — Bhagwan Shiv
हर मास की दोनों एकादशी पर विष्णु व्रत — अन्न (चावल) त्याग और नाम-जाप।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
साल की सबसे उज्ज्वल पूर्णिमा — चाँदनी में खीर रखने और लक्ष्मी जी के जागरण (कोजागरी) की रात।
सुहागिन महिलाएँ पति की लम्बी आयु के लिए चन्द्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं।
माताएँ सन्तान की खुशहाली के लिए व्रत रखकर तारों को अर्घ्य देती हैं।
श्री राम के अयोध्या लौट आने का उत्सव — प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजा और दीपों की रोशनी।
श्री कृष्ण द्वारा नरकासुर वध की याद — सुबह अभ्यंग स्नान और शाम को दीपदान।
श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रज की रक्षा की — अन्नकूट का भोग और गोवर्धन परिक्रमा।
डूबता और उगता सूर्य — चार दिन का कठिन व्रत; षष्ठी की सन्ध्या और सप्तमी की सुबह अर्घ्य।
चातुर्मास के बाद भगवान विष्णु का जागरण — शुभ कार्यों (विवाह आदि) की दोबारा शुरुआत।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकट दूर करने वाला गणेश व्रत; चन्द्रोदय पर अर्घ्य।
भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव का प्राकट्य — काशी के कोतवाल की विशेष पूजा।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
कुरुक्षेत्र में श्री कृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया — गीता पाठ का दिन।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
ब्रह्मा-विष्णु-महेश के सम्मिलित अवतार भगवान दत्तात्रेय का जन्मोत्सव।
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकट दूर करने वाला गणेश व्रत; चन्द्रोदय पर अर्घ्य।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश — उत्तरायण की शुरुआत। गंगा स्नान, तिल-गुड़ दान और पतंग का पर्व।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
माताएँ सन्तान की लम्बी आयु के लिए गणेश जी का व्रत रखती हैं; चन्द्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खुलता है।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
विद्या और कला की देवी माँ सरस्वती की पूजा; बसन्त ऋतु का स्वागत। पीले वस्त्र और पीले भोग की परम्परा।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकट दूर करने वाला गणेश व्रत; चन्द्रोदय पर अर्घ्य।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
शिव और शक्ति के मिलन की रात — उपवास, रात के चार पहर का अभिषेक और जागरण।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
भक्त प्रह्लाद की रक्षा और होलिका के अन्त की याद — बुराई पर अच्छाई की जीत की अग्नि।
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकट दूर करने वाला गणेश व्रत; चन्द्रोदय पर अर्घ्य।
हर मास की दोनों एकादशी पर विष्णु व्रत — अन्न (चावल) त्याग और नाम-जाप।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
हिन्दू नव वर्ष (विक्रम संवत) के साथ माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना — घटस्थापना से राम नवमी तक।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जन्मोत्सव — अयोध्या में मध्याह्न में जन्म-आरती।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
पवनपुत्र हनुमान जी का जन्मोत्सव — हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड और चोला चढ़ाने की परम्परा।
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकट दूर करने वाला गणेश व्रत; चन्द्रोदय पर अर्घ्य।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
"अक्षय" — जो कभी क्षय न हो। दान, जप और नए काम की शुरुआत के लिए अबूझ मुहूर्त।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु का नरसिंह अवतार — सन्ध्या काल में पूजा।
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकट दूर करने वाला गणेश व्रत; चन्द्रोदय पर अर्घ्य।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
सुहागिन महिलाएँ पति की लम्बी आयु के लिए बरगद (वट) की पूजा करती हैं — सावित्री की श्रद्धा की याद।
साल की सबसे कठिन एकादशी — बिना जल के व्रत; साल भर की सब एकादशियों का फल।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकट दूर करने वाला गणेश व्रत; चन्द्रोदय पर अर्घ्य।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
पुरी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की विशाल रथ यात्रा — गुण्डिचा मन्दिर तक।
हर मास की दोनों एकादशी पर विष्णु व्रत — अन्न (चावल) त्याग और नाम-जाप।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
महर्षि वेद व्यास की जयन्ती और गुरु के प्रति कृतज्ञता का पर्व (व्यास पूर्णिमा)।
भगवान शिव का प्रिय मास — सावन सोमवार व्रत, काँवड़ यात्रा और मंगला गौरी व्रत।
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकट दूर करने वाला गणेश व्रत; चन्द्रोदय पर अर्घ्य।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
हर मास की दोनों एकादशी पर विष्णु व्रत — अन्न (चावल) त्याग और नाम-जाप।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
भाई-बहन के स्नेह का पर्व — श्रावण पूर्णिमा पर भद्रा रहित मुहूर्त में राखी।
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकट दूर करने वाला गणेश व्रत; चन्द्रोदय पर अर्घ्य।
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की आधी रात श्री कृष्ण का जन्मोत्सव — व्रत, झाँकी और निशीथ पूजा।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
माँ पार्वती की तपस्या की याद — सुहागिन और कुमारी कन्याएँ निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
गणपति बप्पा का आगमन — मध्याह्न में स्थापना, दस दिन का उत्सव और अनन्त चतुर्दशी पर विसर्जन।
हर मास की दोनों एकादशी पर विष्णु व्रत — अन्न (चावल) त्याग और नाम-जाप।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
अनन्त रूप विष्णु की पूजा और 14 गाँठ वाला अनन्त सूत्र; गणेश विसर्जन का दिन।
पूर्वजों की स्मृति में श्राद्ध, तर्पण और दान के 15 दिन — सर्व पितृ अमावस्या पर समापन।
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकट दूर करने वाला गणेश व्रत; चन्द्रोदय पर अर्घ्य।
बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखण्ड में माताएँ सन्तान की लम्बी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
माँ दुर्गा के नौ रूपों की नौ दिन आराधना — घटस्थापना से महानवमी तक, फिर विजयादशमी।
नवरात्रि की महाअष्टमी — माँ महागौरी की पूजा, सन्धि पूजा और कन्या पूजन।
श्री राम की रावण पर और माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय — असत्य पर सत्य की जीत।
हर मास की दोनों एकादशी पर विष्णु व्रत — अन्न (चावल) त्याग और नाम-जाप।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
साल की सबसे उज्ज्वल पूर्णिमा — चाँदनी में खीर रखने और लक्ष्मी जी के जागरण (कोजागरी) की रात।
सुहागिन महिलाएँ पति की लम्बी आयु के लिए चन्द्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं।
माताएँ सन्तान की खुशहाली के लिए व्रत रखकर तारों को अर्घ्य देती हैं।
श्री कृष्ण द्वारा नरकासुर वध की याद — सुबह अभ्यंग स्नान और शाम को दीपदान।
श्री राम के अयोध्या लौट आने का उत्सव — प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजा और दीपों की रोशनी।
श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रज की रक्षा की — अन्नकूट का भोग और गोवर्धन परिक्रमा।
डूबता और उगता सूर्य — चार दिन का कठिन व्रत; षष्ठी की सन्ध्या और सप्तमी की सुबह अर्घ्य।
चातुर्मास के बाद भगवान विष्णु का जागरण — शुभ कार्यों (विवाह आदि) की दोबारा शुरुआत।
त्रयोदशी की सन्ध्या (प्रदोष काल) में शिव पूजा — दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि प्रदोष।
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकट दूर करने वाला गणेश व्रत; चन्द्रोदय पर अर्घ्य।
भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव का प्राकट्य — काशी के कोतवाल की विशेष पूजा।
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