भगवद्गीता ११.११ Bhagavad Gita 11.11
दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् ।
सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम् ॥११.११॥
divyamālyāmbaradharaṃ divyagandhānulepanam
sarvāścaryamayaṃ devamanantaṃ viśvatomukham
हिन्दी भावार्थ
वे दिव्य मालाएँ और वस्त्र धारण किए हुए थे, दिव्य सुगंध का लेप लगाए थे। वह रूप सब आश्चर्यों से भरा, अनंत और सब ओर मुख वाला था।
Bhajan Dhun द्वारा नया लिखा भावार्थ — विद्वानों द्वारा समीक्षा जारी है।
संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता 11.11 (अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग, श्लोक 11)
