भगवद्गीता ११.४२ Bhagavad Gita 11.42
यच्चावहासार्थमसत्कृतोऽसि विहारशय्यासनभोजनेषु ।
एकोऽथवाप्यच्युत तत्समक्षं तत्क्षामये त्वामहमप्रमेयम् ॥११.४२॥
yaccāvahāsārthamasatkṛto'si vihāraśayyāsanabhojaneṣu
eko'thavāpyacyuta tatsamakṣaṃ tatkṣāmaye tvāmahamaprameyam
हिन्दी भावार्थ
और हे अच्युत! हँसी-मज़ाक में घूमते, सोते, बैठते या खाते समय, अकेले में या दूसरों के सामने आपका जो अपमान हुआ, उन सबके लिए मैं अपार प्रभाव वाले आपसे क्षमा माँगता हूँ।
Bhajan Dhun द्वारा नया लिखा भावार्थ — विद्वानों द्वारा समीक्षा जारी है।
संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता 11.42 (अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग, श्लोक 42)
