Bhajan Dhun Bhajan Dhun Bhakti. Har Din. Har Ghar.
Sign In

अध्याय १२ · भक्तियोग

भगवद्गीता १२.४ Bhagavad Gita 12.4

संनियम्येन्द्रियग्रामं सर्वत्र समबुद्धयः ।
ते प्राप्नुवन्ति मामेव सर्वभूतहिते रताः ॥१२.४॥

saṃniyamyendriyagrāmaṃ sarvatra samabuddhayaḥ
te prāpnuvanti māmeva sarvabhūtahite ratāḥ

हिन्दी भावार्थ

और सब प्राणियों के हित में लगे रहते हैं, वे भी मुझे ही प्राप्त होते हैं।

Bhajan Dhun द्वारा नया लिखा भावार्थ — विद्वानों द्वारा समीक्षा जारी है।

संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता 12.4 (अध्याय 12, भक्तियोग, श्लोक 4)