अध्याय १३ · क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग
भगवद्गीता १३.१२ Bhagavad Gita 13.12
अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम् ।
एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोऽन्यथा ॥१३.१२॥
adhyātmajñānanityatvaṃ tattvajñānārthadarśanam
etajjñānamiti proktamajñānaṃ yadato'nyathā
हिन्दी भावार्थ
अध्यात्म-ज्ञान में सदा लगे रहना और तत्त्व-ज्ञान के लक्ष्य (परमात्मा) को देखना — यह सब ज्ञान कहलाता है, और जो इससे उलटा है वह अज्ञान है।
Bhajan Dhun द्वारा नया लिखा भावार्थ — विद्वानों द्वारा समीक्षा जारी है।
संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता 13.12 (अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग, श्लोक 12)
