अध्याय १३ · क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग
भगवद्गीता १३.८ Bhagavad Gita 13.8
अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम् ।
आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः ॥१३.८॥
amānitvamadambhitvamahiṃsā kṣāntirārjavam
ācāryopāsanaṃ śaucaṃ sthairyamātmavinigrahaḥ
हिन्दी भावार्थ
अपने को बड़ा न मानना, दिखावा न करना, अहिंसा, क्षमा, सरलता, गुरु की सेवा, पवित्रता, स्थिरता और मन का संयम —
Bhajan Dhun द्वारा नया लिखा भावार्थ — विद्वानों द्वारा समीक्षा जारी है।
संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता 13.8 (अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग, श्लोक 8)
