अध्याय १६ · दैवासुरसम्पद्विभागयोग
भगवद्गीता १६.२४ Bhagavad Gita 16.24
तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ ।
ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि ॥१६.२४॥
tasmācchāstraṃ pramāṇaṃ te kāryākāryavyavasthitau
jñātvā śāstravidhānoktaṃ karma kartumihārhasi
हिन्दी भावार्थ
इसलिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसके निर्णय में शास्त्र ही तुम्हारे लिए प्रमाण है। शास्त्र में बताए कर्म को जानकर तुम्हें इस संसार में वही करना चाहिए।
Bhajan Dhun द्वारा नया लिखा भावार्थ — विद्वानों द्वारा समीक्षा जारी है।
संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता 16.24 (अध्याय 16, दैवासुरसम्पद्विभागयोग, श्लोक 24)
