Bhajan Dhun Bhajan Dhun Bhakti. Har Din. Har Ghar.
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अध्याय १६ · दैवासुरसम्पद्विभागयोग

भगवद्गीता १६.३ Bhagavad Gita 16.3

तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता ।
भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत ॥१६.३॥

tejaḥ kṣamā dhṛtiḥ śaucamadroho nātimānitā
bhavanti sampadaṃ daivīmabhijātasya bhārata

हिन्दी भावार्थ

तेज, क्षमा, धैर्य, पवित्रता, किसी से द्रोह न करना और अपने को बड़ा न मानना — हे भारत, ये दैवी सम्पदा (दिव्य गुणों) के साथ जन्मे व्यक्ति के लक्षण हैं।

Bhajan Dhun द्वारा नया लिखा भावार्थ — विद्वानों द्वारा समीक्षा जारी है।

संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता 16.3 (अध्याय 16, दैवासुरसम्पद्विभागयोग, श्लोक 3)