अध्याय १७ · श्रद्धात्रयविभागयोग
भगवद्गीता १७.६ Bhagavad Gita 17.6
कर्षयन्तः शरीरस्थं भूतग्राममचेतसः ।
मां चैवान्तःशरीरस्थं तान्विद्ध्यासुरनिश्चयान् ॥१७.६॥
karṣayantaḥ śarīrasthaṃ bhūtagrāmamacetasaḥ
māṃ caivāntaḥśarīrasthaṃ tānviddhyāsuraniścayān
हिन्दी भावार्थ
जो विवेकहीन लोग शरीर में स्थित पंचभूतों को और शरीर के भीतर रहने वाले मुझ परमात्मा को भी कष्ट देते हैं — उन्हें आसुरी निश्चय वाला जानो।
Bhajan Dhun द्वारा नया लिखा भावार्थ — विद्वानों द्वारा समीक्षा जारी है।
संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता 17.6 (अध्याय 17, श्रद्धात्रयविभागयोग, श्लोक 6)
