अध्याय ९ · राजविद्याराजगुह्ययोग
भगवद्गीता ९.१ Bhagavad Gita 9.1
श्री भगवानुवाच
इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे ।
ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥९.१॥
śrī bhagavānuvāca
idaṃ tu te guhyatamaṃ pravakṣyāmyanasūyave
jñānaṃ vijñānasahitaṃ yajjñātvā mokṣyase'śubhāt
हिन्दी भावार्थ
श्रीभगवान बोले — तुम दोष-दृष्टि नहीं रखते, इसलिए मैं तुम्हें यह सबसे गोपनीय ज्ञान अनुभव सहित बताऊँगा, जिसे जानकर तुम अशुभ (संसार के बंधन) से मुक्त हो जाओगे।
Bhajan Dhun द्वारा नया लिखा भावार्थ — विद्वानों द्वारा समीक्षा जारी है।
संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता 9.1 (अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग, श्लोक 1)
