केतु ग्रह Ketu
कारक: अध्यात्म, वैराग्य, अन्तर्ज्ञान, मोक्ष, गुप्त विद्या और अचानक बदलाव
एक नज़र में
- शुभ दिन
- मंगलवार
- शुभ रंग
- धूसर, चितकबरा
- देवता / आराधना
- भगवान गणेश
- रत्न
- लहसुनिया (Cat's Eye) *
- धातु
- मिश्रित धातु
- स्वराशि
- — (छाया ग्रह)
- उच्च राशि
- वृश्चिक (कुछ मत: धनु)
- नीच राशि
- वृषभ (कुछ मत: मिथुन)
* रत्न केवल अपनी पूरी कुंडली दिखाकर, अनुभवी ज्योतिषी की सलाह से ही पहनें — गलत रत्न नुकसान भी कर सकता है।
मंत्र
बीज मंत्र
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः॥
सरल मंत्र
ॐ कें केतवे नमः॥
रोज़ या मंगलवार को 108 बार (एक माला)। पूरा अनुष्ठान: 17,000 जाप — पंडित जी के मार्गदर्शन में।
🔊 नवग्रह मंत्र सुनेंकुंडली के 12 भावों में केतु का फल
यह आम शास्त्रीय मान्यता का सरल सार है। असली फल ग्रह की राशि, दृष्टि, बल और दशा पर निर्भर करता है — इसे पक्की भविष्यवाणी न मानें।
- 1प्रथम भाव (तनु भाव (लग्न))
आध्यात्मिक और अन्तर्मुखी; कभी-कभी मन में उलझन।
- 2द्वितीय भाव (धन भाव)
वाणी में रूखापन, परिवार से दूरी, धन में उतार-चढ़ाव।
- 3तृतीय भाव (सहज / पराक्रम भाव)
साहसी, अध्यात्म के लिए यात्राएँ — शुभ स्थिति।
- 4चतुर्थ भाव (सुख भाव)
घर से वैराग्य, माता से भावनात्मक दूरी सम्भव।
- 5पंचम भाव (संतान / विद्या भाव)
अन्तर्ज्ञान, मंत्र-साधना में रुचि; संतान से जुड़ी चिन्ता।
- 6षष्ठ भाव (शत्रु / रोग भाव)
शत्रु और रोगों पर विजय — शुभ स्थिति।
- 7सप्तम भाव (विवाह / जाया भाव)
दाम्पत्य में दूरी या उदासीनता से बचें; आपसी बातचीत ज़रूरी।
- 8अष्टम भाव (आयु भाव)
गुप्त विद्या और ज्योतिष में गहरी रुचि; अचानक घटनाएँ।
- 9नवम भाव (भाग्य / धर्म भाव)
कर्मकाण्ड से अधिक आत्मज्ञान में रुचि।
- 10दशम भाव (कर्म भाव)
करियर में बदलाव; तकनीकी या शोध कार्य में सफलता।
- 11एकादश भाव (लाभ भाव)
अचानक लाभ, पर बड़ी इच्छाओं से वैराग्य।
- 12द्वादश भाव (व्यय भाव)
मोक्ष कारक स्थिति — आध्यात्मिक उन्नति, ध्यान और साधना में सफलता।
सरल उपाय
- गणेश जी की पूजा करें, "ॐ गं गणपतये नमः" का जाप करें।
- कुत्ते को रोटी खिलाएँ।
- ध्यान और आध्यात्मिक साधना करें।
दान
कम्बल, सप्तधान्य, तिल; कुत्ते को रोटी
आपकी कुंडली में कौन-सा ग्रह किस भाव में है?
जन्म तिथि, समय और स्थान डालकर फ़्री कुंडली बनाएँ — हर भाव और उसमें बैठे ग्रहों का अर्थ वहीं दिखेगा।
