सूर्य ग्रह Surya (Sun)
कारक: आत्मा, पिता, आत्मविश्वास, मान-सम्मान, सरकार और सरकारी काम, हड्डियाँ और आँखें
एक नज़र में
- शुभ दिन
- रविवार
- शुभ रंग
- लाल, केसरिया
- देवता / आराधना
- सूर्य देव (आदित्य हृदय स्तोत्र)
- रत्न
- माणिक्य (Ruby) *
- धातु
- ताँबा
- स्वराशि
- सिंह
- उच्च राशि
- मेष
- नीच राशि
- तुला
* रत्न केवल अपनी पूरी कुंडली दिखाकर, अनुभवी ज्योतिषी की सलाह से ही पहनें — गलत रत्न नुकसान भी कर सकता है।
मंत्र
बीज मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥
सरल मंत्र
ॐ घृणि सूर्याय नमः॥
रोज़ या रविवार को 108 बार (एक माला)। पूरा अनुष्ठान: 7,000 जाप — पंडित जी के मार्गदर्शन में।
🔊 नवग्रह मंत्र सुनेंकुंडली के 12 भावों में सूर्य का फल
यह आम शास्त्रीय मान्यता का सरल सार है। असली फल ग्रह की राशि, दृष्टि, बल और दशा पर निर्भर करता है — इसे पक्की भविष्यवाणी न मानें।
- 1प्रथम भाव (तनु भाव (लग्न))
आत्मविश्वासी, स्वाभिमानी और नेतृत्व करने वाले। अहंकार से बचें, सिर और आँखों का ध्यान रखें।
- 2द्वितीय भाव (धन भाव)
वाणी में अधिकार, पैतृक या सरकारी स्रोत से धन। कड़वी बोली और परिवार में मतभेद से बचें।
- 3तृतीय भाव (सहज / पराक्रम भाव)
साहसी और पराक्रमी, अपनी मेहनत से सफलता। भाई-बहनों से कभी-कभी खिंचाव।
- 4चतुर्थ भाव (सुख भाव)
घर-ज़मीन में लाभ की सम्भावना, पर मन की शान्ति और माता के स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
- 5पंचम भाव (संतान / विद्या भाव)
तेज़ बुद्धि, शिक्षा में मान-सम्मान। संतान से जुड़ी चिन्ता का संकेत भी माना जाता है।
- 6षष्ठ भाव (शत्रु / रोग भाव)
शत्रुओं पर विजय, प्रतियोगिता और सरकारी नौकरी के लिए शुभ। पाचन का ध्यान रखें।
- 7सप्तम भाव (विवाह / जाया भाव)
प्रभावशाली जीवनसाथी। दाम्पत्य में अहं का टकराव न होने दें।
- 8अष्टम भाव (आयु भाव)
अचानक बदलाव और गुप्त विद्याओं में रुचि। स्वास्थ्य और पिता से सम्बन्ध पर ध्यान दें।
- 9नवम भाव (भाग्य / धर्म भाव)
धार्मिक और भाग्यशाली, पिता व गुरु का मार्गदर्शन। विचारों में कठोरता न आने दें।
- 10दशम भाव (कर्म भाव)
सबसे बलवान स्थिति (दिग्बल) — करियर, पद, सम्मान और सरकारी क्षेत्र में सफलता का अच्छा योग।
- 11एकादश भाव (लाभ भाव)
आय में वृद्धि, प्रभावशाली मित्र और इच्छाओं की पूर्ति।
- 12द्वादश भाव (व्यय भाव)
विदेश या दूर स्थानों से जुड़ाव, खर्च अधिक। नींद और आँखों का ध्यान रखें; अध्यात्म में रुचि।
सरल उपाय
- रोज़ सुबह ताँबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें।
- पिता और बड़ों का सम्मान करें, उनका आशीर्वाद लें।
- रविवार को आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
दान
गेहूँ, गुड़, ताँबा, लाल वस्त्र (रविवार सुबह)
आपकी कुंडली में कौन-सा ग्रह किस भाव में है?
जन्म तिथि, समय और स्थान डालकर फ़्री कुंडली बनाएँ — हर भाव और उसमें बैठे ग्रहों का अर्थ वहीं दिखेगा।
